BTC-2010 बैच में प्रशिक्षित शिक्षामित्र दोबारा शिक्षामित्र बनने को मजबूर है | सरकार ने उन्हें दोबारा शिक्षामित्र के रूप में नियुक्त करने का आदेश दिया है | शिक्षामित्रो के साथ ये कैसा धोखा है ? बेचारे शिक्षामित्रो ने ढाई साल में अपनी BTC ट्रेनिंग पूरी की और अपना ढाई साल का मानदेय गंवाया जो कि 3500 रूपये प्रति माह था और अब बेचारे शिक्षामित्र पुनः शिक्षामित्र बनने को मजबूर है | ये सभी शिक्षामित्र अब BSA ऑफिस के चक्कर काट रहे है और शिक्षामित्र के रूप में पुनः नियुक्ति के लिए रिश्वत देने को मजबूर है | बुरा हाल तो उन शिक्षामित्रो का है जिन्होंने प्राइवेट कॉलेज से BTC की है और हज़ारो लाखो रूपये फीस जमा की है और अब फिर से रिश्वत देकर शिक्षामित्र बनने जा रहे है। आप ही बताएं इन्हें बेचारे ना कहूँ तो क्या कहूं।
बड़ा सवाल : क्या BTC प्रशिक्षित शिक्षामित्रो को पुनः शिक्षामित्रो के रूप में नियुक्त होना चाहिये या
सरकार के खिलाफ कोर्ट जाकर अपना अधिकार मांगना चाहिये ?
सरकार के खिलाफ कोर्ट जाकर अपना अधिकार मांगना चाहिये ?
मेरे शिक्षामित्र भाइयो / बहनों बेचारा मत बनो और अपने अधिकार के लिए लड़ो|

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