लखनऊ। राज्य सरकार उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों पर मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने से छूट देना चाहती है, अधिकतर मंत्रियों ने भी इस सहमति तो जताई है। अंतिम निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया है।
वह इस बारे में विधिक राय लेकर स्वयं निर्णय करेंगे। कैबिनेट में लिए गए एक अन्य निर्णय के मुताबिक मोअल्लिम व डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को शिक्षक बनने के लिए आयु सीमा में छूट प्रदान कर दी गई है। इन्हें यह लाभ रिटायर होने की उम्र तक मिलेगा। इसके लिए 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम और डिप्लोमा इन टीचिंग करने वाले ही पात्र होंगे।
राज्य सरकार मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को प्राइमरी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के रिक्त 2911 पदों पर रखना चाहती है। पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी पास होने की अनिवार्यता आड़े आ रही है। यूपी में 2011 में टीईटी आयोजित की गई थी। मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को भी बैठने की अनुमति दी गई थी, लेकिन अधिकतर इसमें या तो बैठे नहीं और जो बैठे भी उनमें से कई परीक्षा पास नहीं कर सके।
राज्य सरकार चाहती है कि इन्हें टीईटी पास किए बिना ही शिक्षक बना दिया जाए। इसके लिए विधिक परामर्श भी लिया गया। विधिक राय में सुझाव दिया गया है कि उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया जाए। इसमें यदि टीईटी पास मिलते हैं, तो सरकार उन्हें शिक्षक नियुक्त कर दे। समुचित संख्या में टीईटी उत्तीर्ण न मिलने पर बिना टीईटी पास वालों को शिक्षक नियुक्ति कर लिया जाए। इसके अलावा राज्य सरकार ने परिषदीय स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों पर 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम-ए-उर्दू तथा अलीगढ़ विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को बीटीसी के समकक्ष मानते हुए शिक्षक बनने के लिए पात्र मानते हुए आयु सीमा में छूट देने का निर्णय किया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 में प्रावधान कर दिया गया है।

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