जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षक के रूप में बीपीएड धारकों की नियुक्ति की संभावनाएं नजर आने लगी हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस संबंध में दाखिल याचिका पर सरकार को चार माह में एनसीटीई से सलाह कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने धीरेंद्र प्रताप यादव की ओर दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि शारीरिक शिक्षा अनिवार्य विषय है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस संबंध में एक पत्र एनसीटीई को पूर्व में लिखा जा चुका है। एनसीटीई की ओर से भी राज्य सरकारों को एक परिपत्र जारी किया गया है। अदालत ने इस पर सचिव बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया कि वह संबंध लोगों से राय कर इस मामले में विधि सम्मत कार्रवाई करें।
गौरतलब है कि इसके पहले 1998 से लेकर 2008 तक प्राथमिक स्कूलों में बीडीएड धारकों की विशिष्ट बीटीसी के तहत सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति होती रही है। इसे देखते हुए ही यह याचिका दायर की गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति वीके शुक्ला ने धीरेंद्र प्रताप यादव की ओर दाखिल एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि शारीरिक शिक्षा अनिवार्य विषय है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इस संबंध में एक पत्र एनसीटीई को पूर्व में लिखा जा चुका है। एनसीटीई की ओर से भी राज्य सरकारों को एक परिपत्र जारी किया गया है। अदालत ने इस पर सचिव बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया कि वह संबंध लोगों से राय कर इस मामले में विधि सम्मत कार्रवाई करें।
गौरतलब है कि इसके पहले 1998 से लेकर 2008 तक प्राथमिक स्कूलों में बीडीएड धारकों की विशिष्ट बीटीसी के तहत सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति होती रही है। इसे देखते हुए ही यह याचिका दायर की गई थी।
Updated on: Mon, 24 Dec 2012 09:09 AM (IST)

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