लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के लगभग 8000 बीएड छात्रों पर लखनऊ विवि प्रशासन के जिम्मेदारों की लापरवाही भारी पड़ रही है। सही डाटा न भेजे जाने के कारण जहां बीएड की एक सत्र की डिग्री छपने से रह गई वहीं बाद के सत्रों में भी जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। फिलहाल छात्र केवल प्रोविजनल डिग्री लेकर छात्र काम चला रहे हैं लेकिन अगले महीने से शुरू होने शिक्षक भर्ती की काउंसलिंग के समय मूल प्रमाणपत्र न होने पर उनके भविष्य पर संकट मंडराने के आसार है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएड के 35 संबद्ध कॉलेज हैं। इनमें लगभग 4000 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। सत्र 2008-09 में इन छात्रों की डिग्री एजेंसी को छपने को भेजी गयी लेकिन उसमें थ्योरी एवं प्रैक्टिकल के अंकों का विवरण सही ढंग से नहीं भेजा गया। इसके चलते डिग्री नहीं छप सकी। सत्र 2009-10 को शासन ने शून्य घोषित कर दिया। 2010-11 की बीएड की डिग्री छपवाने पर जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। इसके चलते दो सत्रों के लगभग 8000 बीएड छात्र-छात्राओं को समय से डिग्री नहीं मिल सकी। अब जब शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई और छात्रों ने लखनऊ विवि की ओर रुख किया तो हकीकत सामने आई। फिलहाल लखनऊ विवि प्रशासन जल्द से जल्द डिग्री छपवाकर वितरित कराने का आश्वासन दे रहा है।
कोट्स डाटा भेजने में कुछ चूक होने के चलते बीएड के पुराने सत्र की डिग्री नहीं छप सकी थी। कार्यभार संभालने के बाद मैंने डिग्री पर खास तौर से ध्यान दिया है। इस संदर्भ में एजेंसी से बात की गई है। डिग्रियों की छपाई अभी प्रक्रिया में है। इस माह के अंत तक डिग्री का वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
- प्रो. अकील अहमद, परीक्षा नियंत्रक, लखनऊ विश्वविद्यालय
Lucknow | Last updated on: December 18, 2012 5:30 AM IST

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