Monday, 14 January 2013

मोअल्लिम को टीईटी से छूट देने पर फंसा पेंच

लखनऊ (ब्यूरो)। मोअल्लिम धारकों को बगैर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास किए शिक्षक बनाने में नया पेंच फंस गया है। न्याय विभाग ने सुझाव दिया है कि शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करने की अनिवार्यता राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षक परिषद (एनसीटीई) ने निर्धारित की है लिहाजा छूट देने पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार भी उसी को है। बेसिक शिक्षा विभाग इस संबंध में जल्द ही एनसीटीई से पत्राचार करेगा।
राज्य सरकार 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को उर्दू शिक्षक बनाना चाहती है। प्राइमरी स्कूलों में अभी 2,911 पद खाली हैं। सबसे बड़ी दुविधा टीईटी को लेकर है। एनसीटीई ने कक्षा 8 तक के स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य कर रखा है। कैबिनेट की 4 दिसंबर को हुई बैठक में टीईटी पास किए बिना ही मोअल्लिम और डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को शिक्षक बनाने पर सहमति तो बनी, पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को दे दिया गया। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों से बात की। अधिकारियों ने तर्क दिया कि यदि मोअल्लिम को टीईटी पास किए बिना शिक्षक बनाया गया तो टीईटी नहीं पास कर सकने वाले बीटीसी धारक भी इसके लिए दावा करेंगे। यही नहीं कोर्ट में भी मामला फंस सकता है। न्याय विभाग ने भी कुछ इसी तरह सुझाव दिया है। इसमें कहा गया है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले एनसीटीई से टीईटी पर छूट देने को लेकर सहमति ले ली जाए, ताकि कोर्ट में मामला न फंसे। सूत्रों का कहना है कि शीघ्र ही इस संबंध में एनसीटीई से पत्राचार किया जाएगा, ताकि इस पर अंतिम निर्णय किया जा सके।

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