कानपुर, शिक्षा संवाददाता: उनके आंखों में आंसू, आवाज में आक्रोश और चेहरों पर मंजिल के पास पहुंच कर पीछे ढकेले जाने की संभावना की दहशत साफ दिख रही थी। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि उनका रास्ता रोका गया तो वे संघर्ष करेंगे। जरूरत पड़ी तो आत्मदाह भी करेंगे।
ये हालात 2011-12 की बीएड परीक्षा उत्तीर्ण टीईटी क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थी की हैं जिन्होंने हाल ही में प्राथमिक विद्यालयों में निकाली गई शिक्षकों की भर्ती के लिए आवेदन किया है। अब संकेत मिल रहे हैं कि उन्हें इस बार की भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। ये अभ्यर्थी मीडिया से वार्ता करने प्रेस क्लब में जमा हुए थे। हालांकि अभी तक इस संबध में कोई शासनादेश नहीं आया है परंतु न्यायालय के एक फैसले के आधार पर अधिकारियों ने इसके संकेत दिए तभी से अभ्यर्थी तनावग्रस्त हैं।
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2011-12 में हुई थी। उसी सत्र में बीएड में शामिल हो रहे छात्रों ने मांग की थी कि उन्हें भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। उन्हें मौका मिला और प्रदेश भर में 20 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने टीईटी क्वालीफाई कर लिया। उन्हें शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने का अवसर भी दिया गया। अभ्यर्थी कहते हैं कि अधिकांश ने प्रति जिला 500 रुपये शुल्क अदा करके 20 से 60 जिलों में आवेदन किया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो 2013 में ओवर एज हो रहे हैं, उनको तो आगे मौका ही नहीं मिलेगा।
प्रेस क्लब व शिक्षक पार्क में सज्जन यादव, कैलाश गौतम, प्रदीप बाल्मीकि, प्रेम कुमार, राहुल द्विवेदी, जितेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में मौजूद अभ्यर्थियों में कुछ इतने दुखी दिखे कि वे अपने आंसू नहीं रोक पाए। कुछ इतने आक्रोश में थे कि 18 जनवरी को विधान सभा के सामने आत्मदाह करने की घोषणा कर दी। कुछ ने मुख्यमंत्री का घेराव करने की चेतावनी दी तो कुछ ने यह भी कहा कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव स्वयं शिक्षक रहे हैं, उन्हें बेरोजगार शिक्षकों की पीड़ा महसूस करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें बाहर करके अपनों को चयनित करने की साजिश की जा रही है।

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