कानपुर, शिक्षा संवाददाता : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता व बीटीसी कर शिक्षक पद पर नियुक्ति मिलने की गारंटी खत्म होने से बीटीसी की साख गिर रही है। इस बार की काउंसलिंग में 40 फीसद अभ्यर्थी नहीं आए जिससे सीटें खाली रहना तय है। 13 से 15 मार्च तक हुई काउंसलिंग में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में 250 सीटों के लिए 500 से अधिक अभ्यर्थी बुलाए गए थे परंतु 40 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी नहीं पहुंचे। जिले में पांच निजी कालेजों को मिलाकर कुल 6 कालेजों में बीटीसी पाठ्यक्रम चल रहा है। अनुदानित का शुल्क 22 हजार व पेड सीट का 44 हजार रुपये है। तीन वर्ष पहले बीटीसी के लिए जबरदस्त मारामारी थी। इस बार एक तिहाई सीटें खाली रहना तय है। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है जबकि इसके पूर्व बीटेक, बीबीए व बीसीए अभ्यर्थी भी बीटीसी की ओर भाग रहे थे। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की अर्हता में टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है। संकट है कि अभ्यर्थी बीटीसी करने के बाद यदि टीईटी नहीं कर पाए तो उनकी डिग्री बेकाम की हो जाएगी। वहीं सत्र विनियमित होने से अभ्यर्थियों की संख्या घटी है। इस बार काउंसलिंग में निजी कालेजों के प्राचार्य व उनके प्रतिनिधि को भी बुलाया गया। उनकी उपस्थिति भी छात्रों का आकर्षित नहीं कर सकी है। उप्र बीटीसी कालेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि शासन ने 31 मार्च तक सभी सीटें भरने को कहा है। यदि सीटें नहीं भरती तो सीधे प्रवेश की अनुमति दी जाए।

No comments:
Post a Comment