Thursday, 14 March 2013

अशासकीय विद्यालयों में बनी रहेगी शिक्षकों की कमी

टीजीटी-पीजीटी 2011 परीक्षा के फिलहाल कोई आसार नहीं
जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद :
प्रदेश के अशासकीय इंटर कालेजों व हाईस्कूलों में आने वाले दिनों में शिक्षकों की कमी बनी रहेगी। प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) तथा प्रवक्ता पद (पीजीटी) की लंबित परीक्षाओं को कराने का माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का फिलहाल कोई इरादा नहीं है।
प्रदेश के अशासकीय इंटर कालेज व हाईस्कूल अरसे से शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रशिक्षित स्नातक और प्रवक्ता के 1514 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया नवंबर 2011 में शुरू की थी। 1514 में 1197 पद टीजीटी और 317 पद पीजीटी के थे। इसके लिए करीब पांच लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। लेकिन बोर्ड ने अभी तक परीक्षा कराने की सुध नहीं ली है, अलग बात है कि बोर्ड ने प्रति अभ्यर्थी 430 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में जरूर वसूले। गत अगस्त में परीक्षा कराने को लेकर सुगबुगाहट जरुर हुई लेकिन बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन के एक घोटाले में नाम आने के बात आगे नहीं बढ़ सकी। उसी दौरान अध्यक्ष को हटाए जाने के बाद से तो परीक्षा को लेकर चल रही कवायद पर पूरी तरह से विराम लग गया। फरवरी में आयोग में नए चेयरमैन की नियुक्ति के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी लेकिन हालात बता रहे है कि आयोग आने वाले छह माह में भी परीक्षा कराने की स्थिति में नहीं है।
आयोग के चेयरमैन प्रो. देवकी नंदन शर्मा के मुताबिक गत फरवरी में आयोग की बोर्ड बैठक में इस बारे चर्चा हुई है। शासन स्तर पर अधिकारियों के साथ इस बारे में विचार विमर्श हुआ है। पहले आयोग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कंप्युटराइज्ड किया जाएगा इसके बाद ही परीक्षाओं के आयोजन को लेकर कोई निर्णय होगा। उन्होंने माना कि शिक्षकों की कमी से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। अध्यक्ष के मुताबिक सिस्टम कंप्युटराइज्ड होने से काम में तेजी आने के साथ पारदर्शिता आएगी। 2011 परीक्षा संपन्न होने के कम से कम छह माह बाद 2012 परीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी। जाहिर है अभ्यर्थियों के पास सिवाय प्रतीक्षा के कोई विकल्प नहीं है।

Updated on: Fri, 15 Mar 2013 08:00 AM (IST)

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