इलाहाबाद/लखनऊ/ब्यूरो
उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर होगी या शैक्षिक गुणांक पर, इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी अब तीन जजों की फुल बेंच को सौंप दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने मंगलवार को वैधानिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर, इसे फुल बेंच को भेजने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बीएड अभ्यर्थियों के एक मामले में सुनाए गए खंडपीठ के आदेश की सुनवाई की जिम्मेदारी भी इसी बेंच के पास है। इस प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया है।
मंगलवार को सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ को अवगत कराया गया कि बीएड अभ्यर्थियों से संबंधित प्रभाकर सिंह केस में दिए खंडपीठ के फैसले को स्पष्टीकरण के लिए फुल बेंच को रैफर कर दिया है।
प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ ने बीएड अभ्यर्थियों को बिना टीईटी उत्तीर्ण किए सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि यदि इस स्तर पर मौजूदा याचिका पर कोई आदेश दिया जाता है और वह फुल बेंच के निर्णय, जो कि अभी आना बाकी है, से असंगत होता है तो वैधानिक समस्या खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थिति में यदि दोनों मामले एक साथ सुने जाएं तो बेहतर होगा।
Last updated on: March 13, 2013 12:26 PM IST
उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर होगी या शैक्षिक गुणांक पर, इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी अब तीन जजों की फुल बेंच को सौंप दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने मंगलवार को वैधानिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर, इसे फुल बेंच को भेजने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बीएड अभ्यर्थियों के एक मामले में सुनाए गए खंडपीठ के आदेश की सुनवाई की जिम्मेदारी भी इसी बेंच के पास है। इस प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया है।
मंगलवार को सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ को अवगत कराया गया कि बीएड अभ्यर्थियों से संबंधित प्रभाकर सिंह केस में दिए खंडपीठ के फैसले को स्पष्टीकरण के लिए फुल बेंच को रैफर कर दिया है।
प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ ने बीएड अभ्यर्थियों को बिना टीईटी उत्तीर्ण किए सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि यदि इस स्तर पर मौजूदा याचिका पर कोई आदेश दिया जाता है और वह फुल बेंच के निर्णय, जो कि अभी आना बाकी है, से असंगत होता है तो वैधानिक समस्या खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थिति में यदि दोनों मामले एक साथ सुने जाएं तो बेहतर होगा।
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