शिक्षिकाओं की नियुक्ति वहीं जहां स्कूल सड़क के पास
• इस बार पहले दिन ही किताबें मुहैया कराई जाएंगी
• 15 अगस्त तक यूनिफॉर्म भी उपलब्ध हो जाएगी
लखनऊ। अदालत के आदेश की वजह से 72,825 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया रुक गई है। यदि यह मामला इसी तरह अदालत में उलझा रहेगा तो हम संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति कर पढ़ाई जारी रखेंगे। यह घोषणा बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में की। प्राथमिक शिक्षा के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि प्रदेश सरकार ने एक साल के भीतर 1.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति की है। ??????
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की सुविधा का ख्याल रखते हुए हमने बड़े पैमाने पर तबादले किए हैं लेकिन किसी भी मामले में रिश्वत नहीं ली गई। अगर कहीं से भी ऐसी शिकायत आई तो अफसरों के खिलाफ हमने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षकों की नियुक्ति केवल उन्हीं जगहों पर होगी जहां कि स्कूल सड़क के पास हैं और आने-जाने की सुविधा है। हमने शिक्षकों को कई अनावश्यक कार्यों से मुक्ति दिला दी है। सभी डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि अब शिक्षकों की ड्यूटी केवल जनगणना, दैवीय आपदा और चुनाव में ही लगाएं। उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा मित्रों का मानदेय 5000 रुपये बढ़ाने की सिफारिश केंद्र से की है। इसके अलावा हमारी कोशिश उन्हें चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग देकर अध्यापक के रूप में नियुक्ति दिलाने की भी है।
बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने शिक्षा विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सदन को बताया कि पिछली बार कुछ दिक्कतों की वजह से हम स्कूलों में छात्रों को समय से किताबें उपलब्ध नहीं करा पाए थे लेकिन इस बार पहले से ही सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। इस बार पढ़ाई की शुरुआत के साथ ही पहले दिन ही छात्रों को किताबें मुहैया करा दी जाएंगी और 15 अगस्त तक यूनिफॉर्म भी उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी।
प्राथमिक शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों की योग्यता निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों से कहीं ज्यादा है, लेकिन झूठे प्रचार का शिकार होकर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। सरकारी स्कूलों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रेरित करने का अभियान भी हम शुरू करने वाले हैं।
बसपा विधायक नीरज मौर्य ने प्राथमिक शिक्षा के बजट पर कटौती प्रस्वाव रखते हुए कहा कि यूपी में तीन लाख शिक्षकों की कमी है। बहस में हिस्सा लेते हुए सपा के शिवकांत ओझा ने सुझाव दिया कि बेसिक शिक्षा को फिर से वर्गीकरण करने की जरूरत है। कक्षा तीन से आठ को ही प्राथमिक शिक्षा के अधीन रखना चाहिए जबकि इससे पहले शिशु शिक्षा का वर्ग बनाने की जरूरत है। चर्चा में भाजपा के राधामोहन अग्रवाल, रामलाल अकेला, कालीचरण सुमन, मनोज पांडेय, रुबी प्रसाद ने मुख्य रूप हिस्सा लिया। बाद में ध्वनिमत से बेसिक शिक्षा के बजट को पारित कर दिया गया।

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