Tuesday, 12 March 2013

स्थायी नियुक्ति की दोहरी नीति से परेशान शिक्षामित्र

कानपुर, शिक्षा संवाददाता : बेसिक स्कूलों में स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्ति की दोहरी नीति से बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षामित्रों में आक्रोश है। वे इसका व्यापक विरोध करने की तैयारी में हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सासन ने शिक्षामित्रों की नियुक्तियां की थीं। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने पर उन्हें बीटीसी करा कर अथवा प्रशिक्षण देकर स्थायी शिक्षक बनाने की नीति लागू की गई। इसके तहत प्रदेश में 1100 शिक्षामित्रों को बीटीसी का दो साल का कोर्स पूरा कराया गया। 2010 की बीटीसी की दस प्रतिशत सीटें उन्हें दी गई। इनमें 35 शिक्षामित्र जिले के हैं। उनका प्रशिक्षण पूरा हुए काफी समय बीत चुका है लेकिन नियुक्ति अभी तक शुरू नहीं हुई।
उधर चालू सत्र में अप्रशिक्षित शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण देकर स्थायी शिक्षक बनाने की प्रक्रिया लागू की गई। इसके अंतर्गत पहले बैच के शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2014 में उन्हें स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्त करने की तैयारी है। संकेत मिल रहे हैं कि उन्हें टीईटी भी नहीं करनी होगी। नियुक्ति की इस दोहरी नीति से बीटीसी कर चुके शिक्षामित्र आहत हैं।
इस बात से खफा : दो साल के बीटीसी प्रशिक्षण में वे शिक्षामित्र के मानदेय से भी वंचित हुए फिर भी उन्हें नौकरी नहीं दी जा रही है। वहीं प्रशिक्षण के रास्ते बाद में नियुक्त शिक्षामित्रों को स्थायी नौकरी देने की कोशिश की जा रही है। यदि उन्हें पहले नौकरी नहीं मिली तो वे आंदोलन करेंगे। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि बीटीसी करने वाले शिक्षामित्रों की नियुक्ति के लिए जल्द ऑनलाइन आवेदनपत्र मांगे जाएंगे।

Updated on: Mon, 11 Mar 2013 08:07 PM (IST)

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