Wednesday, 27 March 2013
Tuesday, 19 March 2013
UPTET 2013 :मोअल्लिम धारक तैयार हों तो हो टीईटी
लखनऊ (ब्यूरो)।सूबे के प्राथमिक स्कूलों में करीब पौने तीन लाख शिक्षकों की कमी है, इसके बावजूद सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। दरअसल इसके पीछे मुख्य वजह मोअल्लिम वाले माने जा रहे हैं। मोअल्लिम धारक शिक्षक तो बनना चाहते हैं मगर बगैर टीईटी के। इस पर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी मोअल्लिम धारकों को मनाने में जुटे हैं कि वे टीईटी के लिए राजी हो जाएं ताकि इसका आयोजन कराया जा सके।
शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने के चलते कक्षा 8 तक के स्कूलों में शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षकों की भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश को 31 मार्च 2014 तक का समय दे रखा है। पर स्थिति यह है कि शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी ही नहीं हो पा रही है।
सूबे में पिछली बार टीईटी नवंबर 2011 में आयोजित कराई गई थी। इसके बाद से प्रस्ताव कई बार बना लेकिन परीक्षा नहीं हो पाई। इसमें सबसे बड़ी समस्या मोअल्लिम धारक हैं। दरअसल सपा सरकार मुसलमानों को अपना मुख्य वोट बैंक मानती है और मोअल्लिम धारक इसी का लाभ उठा रहे हैं। वे बगैर टीईटी पास किए शिक्षक बनना चाहते हैं। लिहाजा एनसीटीई की नियमावली हर बार आड़े आ रही है। इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग चाहता है कि मोअल्लिम धारक वाले मान जाएं ताकि टीईटी आयोजित कराई जा सके
Saturday, 16 March 2013
मोअल्लिम वालों को शिक्षक बनाने का प्रस्ताव फिर अटका
लखनऊ (ब्यूरो)। प्राइमरी स्कूलों में मोअल्लिम वालों को उर्दू शिक्षक बनाने का प्रस्ताव फिर अटक गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी का मानना है कि इस पर अन्य मंत्रियों से राय लेकर ही इसे कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जाए। इसके चलते ही ऐन मौके पर इस प्रस्ताव को कैबिनेट मंजूरी के लिए नहीं भेजा गया।
राज्य सरकार 11 अगस्त 1997 से पूर्व मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को प्राइमरी स्कूलों में उर्दू शिक्षक बनाना चाहती है। केंद्र सरकार ने कक्षा 8 तक के स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य कर रखा है। मोअल्लिम धारी टीईटी देना नहीं चाहते हैं। एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोअल्लिम धारक काफी मान-मनौव्वल के बाद टीईटी की तर्ज पर उर्दू अनुवाद की परीक्षा देने को तैयार हुए। इसके आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव बनाकर कैबिनेट मंजूरी का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन ऐन मौके पर इसे रोक लिया गया।
72825 सहायक अध्यापकों की भर्ती पर फिलहाल रोक लगी रहेगी
इलाहाबाद/लखनऊ/ब्यूरो
उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर होगी या शैक्षिक गुणांक पर, इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी अब तीन जजों की फुल बेंच को सौंप दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने मंगलवार को वैधानिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर, इसे फुल बेंच को भेजने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बीएड अभ्यर्थियों के एक मामले में सुनाए गए खंडपीठ के आदेश की सुनवाई की जिम्मेदारी भी इसी बेंच के पास है। इस प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया है।
मंगलवार को सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ को अवगत कराया गया कि बीएड अभ्यर्थियों से संबंधित प्रभाकर सिंह केस में दिए खंडपीठ के फैसले को स्पष्टीकरण के लिए फुल बेंच को रैफर कर दिया है।
प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ ने बीएड अभ्यर्थियों को बिना टीईटी उत्तीर्ण किए सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि यदि इस स्तर पर मौजूदा याचिका पर कोई आदेश दिया जाता है और वह फुल बेंच के निर्णय, जो कि अभी आना बाकी है, से असंगत होता है तो वैधानिक समस्या खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थिति में यदि दोनों मामले एक साथ सुने जाएं तो बेहतर होगा।
Last updated on: March 13, 2013 12:26 PM IST
उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर होगी या शैक्षिक गुणांक पर, इस मामले की सुनवाई की जिम्मेदारी अब तीन जजों की फुल बेंच को सौंप दी गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ ने मंगलवार को वैधानिक दिक्कतों को ध्यान में रखकर, इसे फुल बेंच को भेजने का निर्णय लिया। गौरतलब है कि बीएड अभ्यर्थियों के एक मामले में सुनाए गए खंडपीठ के आदेश की सुनवाई की जिम्मेदारी भी इसी बेंच के पास है। इस प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेज दिया गया है।
मंगलवार को सहायक अध्यापकों की भर्ती के मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुशील हरकौली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र की खंडपीठ को अवगत कराया गया कि बीएड अभ्यर्थियों से संबंधित प्रभाकर सिंह केस में दिए खंडपीठ के फैसले को स्पष्टीकरण के लिए फुल बेंच को रैफर कर दिया है।
प्रभाकर सिंह केस में खंडपीठ ने बीएड अभ्यर्थियों को बिना टीईटी उत्तीर्ण किए सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि यदि इस स्तर पर मौजूदा याचिका पर कोई आदेश दिया जाता है और वह फुल बेंच के निर्णय, जो कि अभी आना बाकी है, से असंगत होता है तो वैधानिक समस्या खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्थिति में यदि दोनों मामले एक साथ सुने जाएं तो बेहतर होगा।
Last updated on: March 13, 2013 12:26 PM IST
BTC का गिरा ग्राफ, TET ने घटाई साख
कानपुर, शिक्षा संवाददाता : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता व बीटीसी कर शिक्षक पद पर नियुक्ति मिलने की गारंटी खत्म होने से बीटीसी की साख गिर रही है। इस बार की काउंसलिंग में 40 फीसद अभ्यर्थी नहीं आए जिससे सीटें खाली रहना तय है। 13 से 15 मार्च तक हुई काउंसलिंग में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में 250 सीटों के लिए 500 से अधिक अभ्यर्थी बुलाए गए थे परंतु 40 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी नहीं पहुंचे। जिले में पांच निजी कालेजों को मिलाकर कुल 6 कालेजों में बीटीसी पाठ्यक्रम चल रहा है। अनुदानित का शुल्क 22 हजार व पेड सीट का 44 हजार रुपये है। तीन वर्ष पहले बीटीसी के लिए जबरदस्त मारामारी थी। इस बार एक तिहाई सीटें खाली रहना तय है। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है जबकि इसके पूर्व बीटेक, बीबीए व बीसीए अभ्यर्थी भी बीटीसी की ओर भाग रहे थे। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती की अर्हता में टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है। संकट है कि अभ्यर्थी बीटीसी करने के बाद यदि टीईटी नहीं कर पाए तो उनकी डिग्री बेकाम की हो जाएगी। वहीं सत्र विनियमित होने से अभ्यर्थियों की संख्या घटी है। इस बार काउंसलिंग में निजी कालेजों के प्राचार्य व उनके प्रतिनिधि को भी बुलाया गया। उनकी उपस्थिति भी छात्रों का आकर्षित नहीं कर सकी है। उप्र बीटीसी कालेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि शासन ने 31 मार्च तक सभी सीटें भरने को कहा है। यदि सीटें नहीं भरती तो सीधे प्रवेश की अनुमति दी जाए।
72825 Trainee Teachers Recruitment : Case Hearing on 12.3.2013
HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
Court No. - 33
Case :- SPECIAL APPEAL No. - 150 of 2013
Petitioner :- Navin Srivastava And Others
Respondent :- State Of U.P. And Others
Petitioner Counsel :- Abhishek Srivastava,Shashi Nandan
Respondent Counsel :- C.S.C.,Bhanu Pratap Singh,C.B.Yadav
Hon'ble Sushil Harkauli,J.
Hon'ble Manoj Misra,J.
From the arguments of the learned counsel appearing on behalf of the parties, it has transpired that in this bunch of appeals the contention of the selected candidates is thatTeacher Eligibility Test (TET) should be upheld and for selection/appointment the merit of the candidates should be calculated as per the marks obtained by them in the TET test in accordance with the Rules as were in force at the relevant time.
It has been pointed out that there is a reference to a larger Bench, which is pending and which involves the question as to whether candidates having certain educational qualifications would also be eligible to be considered for appointment on these very posts without requirement of undertaking the TET.
If, in that reference, it is held that some candidates are entitled to be considered for the appointment, without undertaking the TET, it is obvious that their comparative merit vis-a-vis the present candidates cannot be computed.
The case in which the reference has been made is writ petition No.12908 of 2013 and the date of making the order of reference by the learned single Judge is 8th March, 2013.
Therefore, it would appear to be desirable either that the reference is answered first, before taking a decision on this bunch of appeals, or the bunch of appeals are connected and heard along with the reference.
Let papers of these cases be placed before Hon'ble the Chief Justice for taking such decision in the matter, as he may deem fit. This order will cover Special Appeal Nos.149 of 2013, 152 of 2013, 159 of 2013, 161 of 2013, 205 of 2013, 206 of 2013 and 220 of 2013.
The affidavits, which have been filed today in the Court by the parties in this bunch of appeals, are taken on record. The interim order will continue till the next date of listing.
Order Date :- 12.3.2013.
Rks.
Manoj Misra, J.
Sushil Harkauli, J.
Thursday, 14 March 2013
अशासकीय विद्यालयों में बनी रहेगी शिक्षकों की कमी
टीजीटी-पीजीटी 2011 परीक्षा के फिलहाल कोई आसार नहीं
जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद :
प्रदेश के अशासकीय इंटर कालेजों व हाईस्कूलों में आने वाले दिनों में शिक्षकों की कमी बनी रहेगी। प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) तथा प्रवक्ता पद (पीजीटी) की लंबित परीक्षाओं को कराने का माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का फिलहाल कोई इरादा नहीं है।
प्रदेश के अशासकीय इंटर कालेज व हाईस्कूल अरसे से शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रशिक्षित स्नातक और प्रवक्ता के 1514 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया नवंबर 2011 में शुरू की थी। 1514 में 1197 पद टीजीटी और 317 पद पीजीटी के थे। इसके लिए करीब पांच लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। लेकिन बोर्ड ने अभी तक परीक्षा कराने की सुध नहीं ली है, अलग बात है कि बोर्ड ने प्रति अभ्यर्थी 430 रुपये आवेदन शुल्क के रूप में जरूर वसूले। गत अगस्त में परीक्षा कराने को लेकर सुगबुगाहट जरुर हुई लेकिन बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन के एक घोटाले में नाम आने के बात आगे नहीं बढ़ सकी। उसी दौरान अध्यक्ष को हटाए जाने के बाद से तो परीक्षा को लेकर चल रही कवायद पर पूरी तरह से विराम लग गया। फरवरी में आयोग में नए चेयरमैन की नियुक्ति के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी लेकिन हालात बता रहे है कि आयोग आने वाले छह माह में भी परीक्षा कराने की स्थिति में नहीं है।
आयोग के चेयरमैन प्रो. देवकी नंदन शर्मा के मुताबिक गत फरवरी में आयोग की बोर्ड बैठक में इस बारे चर्चा हुई है। शासन स्तर पर अधिकारियों के साथ इस बारे में विचार विमर्श हुआ है। पहले आयोग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कंप्युटराइज्ड किया जाएगा इसके बाद ही परीक्षाओं के आयोजन को लेकर कोई निर्णय होगा। उन्होंने माना कि शिक्षकों की कमी से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। अध्यक्ष के मुताबिक सिस्टम कंप्युटराइज्ड होने से काम में तेजी आने के साथ पारदर्शिता आएगी। 2011 परीक्षा संपन्न होने के कम से कम छह माह बाद 2012 परीक्षा की प्रक्रिया शुरू होगी। जाहिर है अभ्यर्थियों के पास सिवाय प्रतीक्षा के कोई विकल्प नहीं है।
Updated on: Fri, 15 Mar 2013 08:00 AM (IST)
Tuesday, 12 March 2013
बेसिक शिक्षा मंत्री का विधानसभा में ऐलान : कोर्ट में देर हुई तो संविदा पर रखेंगे शिक्षक
शिक्षिकाओं की नियुक्ति वहीं जहां स्कूल सड़क के पास
• इस बार पहले दिन ही किताबें मुहैया कराई जाएंगी
• 15 अगस्त तक यूनिफॉर्म भी उपलब्ध हो जाएगी
लखनऊ। अदालत के आदेश की वजह से 72,825 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया रुक गई है। यदि यह मामला इसी तरह अदालत में उलझा रहेगा तो हम संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति कर पढ़ाई जारी रखेंगे। यह घोषणा बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने सोमवार को विधानसभा में की। प्राथमिक शिक्षा के बजट पर चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि प्रदेश सरकार ने एक साल के भीतर 1.5 लाख से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति की है। ??????
बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की सुविधा का ख्याल रखते हुए हमने बड़े पैमाने पर तबादले किए हैं लेकिन किसी भी मामले में रिश्वत नहीं ली गई। अगर कहीं से भी ऐसी शिकायत आई तो अफसरों के खिलाफ हमने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षकों की नियुक्ति केवल उन्हीं जगहों पर होगी जहां कि स्कूल सड़क के पास हैं और आने-जाने की सुविधा है। हमने शिक्षकों को कई अनावश्यक कार्यों से मुक्ति दिला दी है। सभी डीएम को निर्देश दिए गए हैं कि अब शिक्षकों की ड्यूटी केवल जनगणना, दैवीय आपदा और चुनाव में ही लगाएं। उन्होंने कहा कि हमने शिक्षा मित्रों का मानदेय 5000 रुपये बढ़ाने की सिफारिश केंद्र से की है। इसके अलावा हमारी कोशिश उन्हें चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग देकर अध्यापक के रूप में नियुक्ति दिलाने की भी है।
बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने शिक्षा विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान सदन को बताया कि पिछली बार कुछ दिक्कतों की वजह से हम स्कूलों में छात्रों को समय से किताबें उपलब्ध नहीं करा पाए थे लेकिन इस बार पहले से ही सारे इंतजाम कर लिए गए हैं। इस बार पढ़ाई की शुरुआत के साथ ही पहले दिन ही छात्रों को किताबें मुहैया करा दी जाएंगी और 15 अगस्त तक यूनिफॉर्म भी उन्हें उपलब्ध करा दी जाएगी।
प्राथमिक शिक्षा मंत्री ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों की योग्यता निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों से कहीं ज्यादा है, लेकिन झूठे प्रचार का शिकार होकर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेज रहे हैं। सरकारी स्कूलों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रेरित करने का अभियान भी हम शुरू करने वाले हैं।
बसपा विधायक नीरज मौर्य ने प्राथमिक शिक्षा के बजट पर कटौती प्रस्वाव रखते हुए कहा कि यूपी में तीन लाख शिक्षकों की कमी है। बहस में हिस्सा लेते हुए सपा के शिवकांत ओझा ने सुझाव दिया कि बेसिक शिक्षा को फिर से वर्गीकरण करने की जरूरत है। कक्षा तीन से आठ को ही प्राथमिक शिक्षा के अधीन रखना चाहिए जबकि इससे पहले शिशु शिक्षा का वर्ग बनाने की जरूरत है। चर्चा में भाजपा के राधामोहन अग्रवाल, रामलाल अकेला, कालीचरण सुमन, मनोज पांडेय, रुबी प्रसाद ने मुख्य रूप हिस्सा लिया। बाद में ध्वनिमत से बेसिक शिक्षा के बजट को पारित कर दिया गया।
स्थायी नियुक्ति की दोहरी नीति से परेशान शिक्षामित्र
कानपुर, शिक्षा संवाददाता : बेसिक स्कूलों में स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्ति की दोहरी नीति से बीटीसी प्रशिक्षित शिक्षामित्रों में आक्रोश है। वे इसका व्यापक विरोध करने की तैयारी में हैं।
शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सासन ने शिक्षामित्रों की नियुक्तियां की थीं। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने पर उन्हें बीटीसी करा कर अथवा प्रशिक्षण देकर स्थायी शिक्षक बनाने की नीति लागू की गई। इसके तहत प्रदेश में 1100 शिक्षामित्रों को बीटीसी का दो साल का कोर्स पूरा कराया गया। 2010 की बीटीसी की दस प्रतिशत सीटें उन्हें दी गई। इनमें 35 शिक्षामित्र जिले के हैं। उनका प्रशिक्षण पूरा हुए काफी समय बीत चुका है लेकिन नियुक्ति अभी तक शुरू नहीं हुई।
उधर चालू सत्र में अप्रशिक्षित शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण देकर स्थायी शिक्षक बनाने की प्रक्रिया लागू की गई। इसके अंतर्गत पहले बैच के शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 2014 में उन्हें स्थायी शिक्षक के रूप में नियुक्त करने की तैयारी है। संकेत मिल रहे हैं कि उन्हें टीईटी भी नहीं करनी होगी। नियुक्ति की इस दोहरी नीति से बीटीसी कर चुके शिक्षामित्र आहत हैं।
इस बात से खफा : दो साल के बीटीसी प्रशिक्षण में वे शिक्षामित्र के मानदेय से भी वंचित हुए फिर भी उन्हें नौकरी नहीं दी जा रही है। वहीं प्रशिक्षण के रास्ते बाद में नियुक्त शिक्षामित्रों को स्थायी नौकरी देने की कोशिश की जा रही है। यदि उन्हें पहले नौकरी नहीं मिली तो वे आंदोलन करेंगे। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि बीटीसी करने वाले शिक्षामित्रों की नियुक्ति के लिए जल्द ऑनलाइन आवेदनपत्र मांगे जाएंगे।
Updated on: Mon, 11 Mar 2013 08:07 PM (IST)
Thursday, 7 March 2013
UPTET
लखनऊ : कक्षा एक से आठ तक में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अनिवार्य की गई अध्यापक पात्रता परीक्षा TET को लेकर विधान परिषद में नेता सदन अहमद हसन का दर्द गुरुवार को छलक गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी हमें TET के नाम पर धमकाते हैं। यह एक ऐसी बला है जो हम सबको परेशान किये हुए है।’
हुआ यूं कि शून्यकाल के दौरान शिक्षक दल के ओम प्रकाश शर्मा व सुरेश त्रिपाठी ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत सदन को अवगत कराया कि 2007-08 में विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 88000 अभ्यर्थियों में से पांच प्रतिशत की परिषदीय स्कूलों में नियुक्ति नहीं हो पा रही है क्योंकि इन अभ्यर्थियों ने TET उत्तीर्ण नहीं किया है। इस पर नेता सदन ने कहा कि प्रकरण में बेसिक शिक्षा निदेशक से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने पर कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कांग्रेस के नसीब पठान यदि मदद करें तो केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार शिक्षकों की भर्ती में TET से छूट दे सकती है।
इससे पहले TET का मुद्दा प्रश्नकाल के दौरान भी उठा। भाजपा के हृदय नारायण दीक्षित ने बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी से पूछा क्या मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को परिषदीय स्कूलों में शिक्षक नियुक्त करने की कोई प्रक्रिया चल रही है? जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि 1997 से पहले मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारकों को शिक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया विचाराधीन है लेकिन इसमें TET बाधा बन रही है। मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधिधारक टीईटी से छूट दिये जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया इस प्रकरण पर विचार करने के लिए उन्होंने 14 मार्च को अफसरों की बैठक बुलायी है।
जिम्मेदार कौन ...?
UPTET अभ्यर्थीयों के दिलों को झकझोरने वाली घटना
अवसाद ग्रस्त चल रहे हैं अभ्यर्थी
नौकरी संग शादी भी टली आहत छात्रा ने दी जान
कानपुर। टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) मामले की कोर्ट में लगातार तारीखें बढ़ने और इस कारण शादी भी आगे बढ़ने से आहत एक छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी।
उस्मानपुर नौबस्ता निवासी बंशराज यादव तंबाकू का व्यापार करते हैं। उनकी 26 वर्षीय पुत्री शक्ति बीएड और टीईटी की परीक्षा पास कर चुकी थी। लेकिन टीईटी का मामला कोर्ट में पहुंचने से शिक्षिका के पद पर उसकी नियुक्ति लटक गई थी। इससे वह परेशान थी। उधर, नौकरी न मिलने के कारण शादी की तारीख भी आगे टल गई थी। इसे लेकर सका तनाव और बढ़ गया था। बुधवार सुबह शक्ति ने कमरा बंद कर पंखे के कुंडे से फांसी लगा ली। मां ललिता देवी ने बेटी को फंदे पर लटका देख शोर मचाया। दरवाजा तोड़कर परिजनों पड़ोसियों की मदद से शव को फंदे से उतारा और हैलट अस्पताल ले भागे, पर डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक छात्रा चार बहनों में सबसे बड़ी थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पिता के मुताबिक टीईटी में अच्छे अंक आने के बाद भी मामला कोर्ट में होने से बेटी परेशान थी। उसकी शादी की तारीख भी आगे बढ़ गई थी। शक्ति शिव-पार्वती के विवाह के दिन शिवरात्रि को शादी करना चाहती थी
News Source : Jagran ( Thu, 07 Mar 2013 11:00 AM (IST))
Tuesday, 5 March 2013
छात्रों को मुफ्त लैपटॉप-टैबलेट दिए जाने को शिक्षण संस्थान करेंगे ऑनलाइन आवेदन
जागरण संवाददाता, इलाहाबाद : छात्रों में मुफ्त लैपटॉप-टैबलेट दिए जाने की प्रदेश सरकार की चुनावी घोषणा को शिक्षण संस्थान अमली जामा पहनाएंगे। विद्यार्थियों को कोई भी आवेदन नहीं करना है। सोमवार को सेंट एंथोनी गर्ल्स इंटर कॉलेज में हुई बैठक में लैपटॉप-टैबलेट वितरण की तैयारियों पर चर्चा की गई। जिले के कॉलेज, महाविद्यालयों और विश्र्वविद्यालय के नुमाइंदे इसमें शामिल थे। अध्यक्षता जिला विद्यालय निरीक्षक ने की। उन्होंने बताया कि सभी शिक्षण संस्थाओं को यूजर आईडी और पासवर्ड जारी किया गया है। इस यूजर आईडी और पासवर्ड के सहारे लैपटॉप-टैबलेट वितरण के लिए तैयार की गई वेबसाइट पर पात्र विद्यार्थियों का ब्यौरा दर्ज कराया जाएगा। ऑनलाइन डाटा फीडिंग का पहला चरण 15 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके तहत राजकीय शैक्षिक संस्थानों और राज्य द्वारा वित्त पोषित संस्थानों को सबसे पहले छात्र-छात्राओं का ब्यौरा 15 मार्च तक उपलब्ध करा देना है। वित्त विहीन संस्थाओं को 30 मार्च तक विद्यार्थियों का ब्यौरा वेबसाइट पर उपलब्ध करा देना है। बैठक में 68 महाविद्यालयों ने प्रतिभाग किया। वरिष्ठ कोषाधिकारी, डीआईओएस, जिला क्रीड़ा सचिव अजय सिंह यादव की मौजूदगी उल्लेखनीय रही।
प्रत्यावेदन पर हो गए प्रमोशन
Updated on: Tue, 05 Mar 2013 08:48 PM (IST)
निज प्रतिनिधि, फीरोजाबाद : बेसिक शिक्षा विभाग में विगत दिनों प्रमोशन होने का मामला प्रकाश में आया है। विभाग द्वारा एक दर्जन से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन किए गए हैं तो इन पदोन्नतियों को लेकर विभाग में शिक्षकों के बीच में भी कई तरह की चर्चा हैं। हालांकि विभाग का कहना है यह पदोन्नति प्रत्यावेदन के आधार पर की गई है तथा लंबे अरसे से प्रमोशन से वंचित चल रहे शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई है। सवाल यह है प्रत्यावेदन पर होने वाले उक्त प्रमोशन पर क्या किसी के अनुमोदन की जरूरत नहीं।
शासन द्वारा पदोन्नति के निर्देश जारी हो गए हैं। शिक्षक प्रमोशन होने का भी इंतजार कर रहे हैं। इधर विभाग में कुछ प्रमोशन होने की खबर है। विभाग से जुड़े शिक्षक ही इन प्रमोशन पर सवाल खड़े कर रहे हैं एवं इन प्रमोशन को अनुमोदन नहीं मिलने की चर्चा भी है। हालांकि विभाग का कहना है यह पदोन्नति पिछली पदोन्नति के आधार पर की गई है। पिछली पदोन्नति में हुई गलतियों के कारण कई शिक्षक प्रमोशन नहीं पा सके थे उनके प्रत्यावेदन पर उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया है। बताया जाता है पूर्व में हुई पदोन्नति में कुछ शिक्षकों को गलत पदोन्नति दी गई थी। विज्ञान शिक्षक होने पर भी विज्ञान शिक्षक के रूप में पदोन्नति मिलने के कारण यह पदोन्नति नहीं पा सके थे।
इस संबंध में बीएसए डा.जितेंद्र सिंह यादव का कहना है कुछ शिक्षक पात्र होने के बाद भी पदोन्नति से वंचित थे। उन शिक्षकों के प्रत्यावेदन थे। इस पर हमने प्रत्यावेदन पर पदोन्नति दी है।
प्रत्यावेदन पर हो गए प्रमोशन
Updated on: Tue, 05 Mar 2013 08:48 PM (IST)
निज प्रतिनिधि, फीरोजाबाद : बेसिक शिक्षा विभाग में विगत दिनों प्रमोशन होने का मामला प्रकाश में आया है। विभाग द्वारा एक दर्जन से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन किए गए हैं तो इन पदोन्नतियों को लेकर विभाग में शिक्षकों के बीच में भी कई तरह की चर्चा हैं। हालांकि विभाग का कहना है यह पदोन्नति प्रत्यावेदन के आधार पर की गई है तथा लंबे अरसे से प्रमोशन से वंचित चल रहे शिक्षकों को प्रोन्नति दी गई है। सवाल यह है प्रत्यावेदन पर होने वाले उक्त प्रमोशन पर क्या किसी के अनुमोदन की जरूरत नहीं।
शासन द्वारा पदोन्नति के निर्देश जारी हो गए हैं। शिक्षक प्रमोशन होने का भी इंतजार कर रहे हैं। इधर विभाग में कुछ प्रमोशन होने की खबर है। विभाग से जुड़े शिक्षक ही इन प्रमोशन पर सवाल खड़े कर रहे हैं एवं इन प्रमोशन को अनुमोदन नहीं मिलने की चर्चा भी है। हालांकि विभाग का कहना है यह पदोन्नति पिछली पदोन्नति के आधार पर की गई है। पिछली पदोन्नति में हुई गलतियों के कारण कई शिक्षक प्रमोशन नहीं पा सके थे उनके प्रत्यावेदन पर उन्हें पदोन्नति का लाभ दिया गया है। बताया जाता है पूर्व में हुई पदोन्नति में कुछ शिक्षकों को गलत पदोन्नति दी गई थी। विज्ञान शिक्षक होने पर भी विज्ञान शिक्षक के रूप में पदोन्नति मिलने के कारण यह पदोन्नति नहीं पा सके थे।
इस संबंध में बीएसए डा.जितेंद्र सिंह यादव का कहना है कुछ शिक्षक पात्र होने के बाद भी पदोन्नति से वंचित थे। उन शिक्षकों के प्रत्यावेदन थे। इस पर हमने प्रत्यावेदन पर पदोन्नति दी है।
Non-TET B.Ed प्रकरण पर कोर्ट का निर्णय
टीईटी प्रकरण में अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र की चेतावनी
Updated on: Tue, 05 Mar 2013 08:54 PM (IST)
जागरण ब्यूरो, इलाहाबाद : बेसिक शिक्षकों की भर्ती के मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रथमदृष्टया इस प्रकरण में आदेशों की अवहेलना प्रतीत होती है। कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए अधिकारियों को आदेश के अनुपालन के लिए एक माह का समय दिया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि ऐसा न होने पर आरोप पत्र तैयार किया जाएगा। मामले की अगली तिथि 24 अप्रैल निर्धारित की गई है। इस तिथि को अधिकारियों से जवाबी हलफनामा भी मांगा गया है।
विश्वनाथ प्रताप सिंह की ओर से दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने यह आदेश सुनाया। याचिका में कोर्ट के उस आदेश की अवहेलना किए जाने की बात कही गई थी जिसमें बीए-बीएससी, बीएड अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल करने के लिए कहा गया था। मंगलवार को याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता आशीष त्रिपाठी ने कोर्ट के संज्ञान में यह तथ्य रखा कि बेसिक शिक्षा विभाग ने अभी तक भूल-सुधार नहीं प्रकाशित किया है और वेबसाइट भी नहीं शुरू की गई है। गौरतलब है कि अदालत भूल-सुधार प्रकाशित करने और वेबसाइट शुरू करने का आदेश पूर्व में ही दे चुकी है।
उल्लेखनीय है कि गत 16 जनवरी को अदालत ने बीए, बीएससी के साथ बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थियों भर्ती में शामिल करने का निर्देश दिया था। इसके लिए 15 दिन की समय सीमा निश्चित की गई थी। आदेश का अनुपालन न होने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई है।
Sunday, 3 March 2013
हिमाचल प्रदेश सरकार ने रखी शर्त, हजारों टीचर्स को भी देनी होगी ' टीईटी परीक्षा'
शिमला। प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दे रहे 3482 प्राथमिक सहायक अध्यापकों (पैट) के नियमितिकरण पर तलवार लटक गई है। नए भर्ती-पदोन्नति नियमों के अनुसार अब इन्हें टीचर्स एलिजीबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना होगा। इन्हें प्रशिक्षण देनेका काम पूरा हो चुका है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक एचआर शर्मा के अनुसार आरटीई एक्ट के अनुसार टीईटी परीक्षा पास करना जरूरी है। यह शर्त पैट पर भी लागू होगी। केंद्रीय कानून होने के कारण प्रदेश स्तर पर इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता। यदि केंद्रीय मंत्रालय नियमों में छूट दे, तो पैट शिक्षकों को राहत मिल सकती है।
इसी माह पूरा किया था 52 दिन का प्रशिक्षण
सरकार ने पैट शिक्षकों को 52 दिन का प्रशिक्षण दिया है। यह प्रशिक्षण इसी माह पूरा हुआ है। इससे पैट शिक्षकों को जेबीटी के पद पर तैनाती दी जा सकती है। हालांकि, नए नियमों के शिक्षकों को अब टीईटी परीक्षा को पास करना होगा।
आरटीई एक्ट से परेशानी
आरटीई एक्ट के अमल में आने से अब शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। यह परीक्षा पैट शिक्षकों को भी देनी होगी। पैट को इससे तभी छूट मिल सकती है, जब प्रदेश सरकार इस मामले को केंद्रीय मंत्रालय से छूट दिलाए।
शिक्षक संघ नाराज, महाधिवेशन में उठाया जाएगा मुद्दा
हिमाचल प्रदेश प्राथमिक सहायक संघ के अध्यक्ष सुनील चौहान के अनुसार शिक्षक 52 दिन की ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। पूर्व सरकार ने 1400 शिक्षकों को तो नियमित किया था, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में लगे 3482 शिक्षकों को इससे अलग रखा गया। जब उनकी भर्ती हुई थी, तो उस समय आरएंडपी रूल अलग थे। ऐसे में उन पर टीईटी की शर्त लागू नहीं होती। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उनको नियमित करने का आश्वासन दिया है, जिसके लिए संघ जल्द महाधिवेशन का आयोजन करेगा
विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन जारी
लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षु वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में नियुक्ति की मांग को लेकर विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007-08 बैच का प्रदर्शन शुक्रवार को भी विधान भवन के सामने जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि जब तक शेष पांच फीसदी प्रशिक्षुओं की नियुक्ति प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में नहीं की जाएगा, प्रदर्शन जारी रहेगा।
आजम खां से मिला विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थियों का प्रतिनिधि मंडल
डेली न्यूज नेटवर्क
लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थियों में से बचे हुए अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधि मंडल लक्ष्मीकांत के नेतृत्व में नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद आजम खां से शुक्रवार को विधान भवन स्थित उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर नियुक्ति किए जाने के संबंध में अपना ज्ञापन सौंपा। आजम खां ने प्रतिनिधि मंडल से सौहर्दपूर्वक वार्ता की और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार द्वारा उनकी मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके ज्ञापन को वह अपने पत्र के साथ मुख्यमंत्री को भेजेंगे और उनसे उनकी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल से अपने अनशन को समाप्त किए जाने का भी अनुरोध किया।
निजी बीटीसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए काउन्सिलिंग 13 मार्च से
-17 मार्च को वेबसाइट पर जारी होगी चयनित अभ्यर्थियों की सूची
-निदेशक एससीईआरटी ने सभी डायट प्राचार्यों को दिया निर्देश
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जागरण ब्यूरो, लखनऊ :राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त और राज्य सरकार से संबद्धता प्राप्त निजी संस्थानों को बीटीसी सत्र 2012-13 में प्रशिक्षणार्थी आवंटित करने के लिए 13,14 व 15 मार्च को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में काउन्सिलिंग होगी। काउन्सिलिंग के उपरांत चयनित अभ्यर्थियों की सूची 17मार्च को वेबसाइट पर जारी कर दी जाएगी। इस संबंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के निदेशक सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंहने सभी डायट प्राचार्यों को निर्देश जारी कर दिया है।
विशेष आरक्षण के सभी श्रेणियों के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग 13 मार्च को होगी। महिला कला व महिला विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों की काउन्सिलिंग 14 तथा पुरुष कला व पुरुष विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों की 15 मार्च को होगी। काउन्सिलिंग के लिए श्रेणीवार कट ऑफ मेरिट की विज्ञप्ति छह मार्च को प्रकाशित की जाएगी।काउन्सिलिंग के समय अभ्यर्थियों से जिले की निजी बीटीसी संस्थाओं केलिए निर्धारित प्रारूप पर वरीयता प्राप्त की जाएगी जिस पर मेरिट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। फ्री और पेड सीट के लिए अभ्यर्थियों से अलग-अलग वरीयता ली जाएगी। चयन सूची में शामिल अभ्यर्थियों को मूल अभिलेखों की जांच के लिए जिला स्तरीय चयन समिति द्वारा निर्धारित तिथि को बुलाया जाएगा। चयन की कार्यवाही को हरहालमें 31 मार्च तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
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