Friday, 23 November 2012

विशेष : मुफ्त की शिक्षा बन रही घोटाले की जननी

सहारनपुर : एनआरएचएम घोटाला तो जगजाहिर हो चुका है। कमोबेश ऐसी ही बू बेसिक शिक्षा विभाग की 'मुफ्त' शिक्षा से आ रही है। मिड-डे मील में प्रदेश स्तर पर चल रहा 'बोरा' घोटाला पकड़ने की फुरसत किसी को नहीं है। जिले में छात्रवृत्ति व भवन निर्माण में 15 लाख से अधिक का घोटाला फाइलों में दफन हो चुका है। ताजा मामला सर्व शिक्षा अभियान की किताबों को रद्दी में बेचने से जुड़ा है। बेसिक शिक्षा के हालात सुधारने के लिए प्रदेश में वर्ष 2001 से सर्व शिक्षा अभियान आरंभ किया गया। योजना के प्रथम चरण में नए स्कूलों का निर्माण, शिक्षकों-शिक्षामित्रों की नियुक्तियां की गई। जिले में योजना पर चार अरब से अधिक की राशि खर्च होने के बावजूद तस्वीर धुंधली है। हद तो यह है कि अब तो शिक्षक व अफसर भी अनौपचारिक रूप से यह स्वीकार करने लगे हैं कि मुफ्त की शिक्षा ने बेसिक शिक्षा का 'बेड़ागर्क' कर डाला। मामला चाहे छात्रवृत्ति का हो या नए स्कूल/अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण, ड्रेस वितरण। हर चीज में कमीशनखोरी के खेल ने घोटाले की नींव डाली। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेश दत्त शर्मा तो सीधे-सीधे सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को घोटाले की बुनियाद बताते हैं।
रद्दी बना डाली हजारों किताबें
जिले में 12 नवंबर को सर्व शिक्षा अभियान की हजारों किताबें जन जागरूकता के चलते पकड़ी गई थी। ये किताबें खुले बाजार में बिक्री के लिए कैसे पहुंचीं। इसकी पुलिस व विभागीय जांच चल रही है। विभाग ने जांच कमेटी को 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
योजनाओं में गड़बड़झाला
नगर क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिकायत के बाद लाखों का घोटाला पकड़ा गया था। जांच अधिकारी नियुक्त किए गए डिप्टी बीएसए सुशील कुमार शर्मा ने विस्तृत रिपोर्ट विभाग को सौंपी। 15 लाख से अधिक के घोटाले में छात्रवृत्ति, स्कूल भवन व अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण का मामला था। आरोपी की आपत्ति पर कराई गई दूसरी विभागीय जांच में आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया। इसके अलावा मिड-डे मील में जब-तब ग्रामीण क्षेत्रों से घोटाले के प्रकरण सामने आते रहे हैं। खाद्यान्न में 'बोरों' का घोटाला पूरे प्रदेश में योजना के जन्म (वर्ष-2005) से चल रहा है।
 Source : Jagran Updated on: Thu, 22 Nov 2012 10:21 PM (IST)

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